Wednesday, April 13, 2011

anna hajare

अन्ना,
१० अप्रैल, रात १० बजे  IBN  न्यूज़ चैनल पर आपका interview सुना ! राजदीप ने चुनाव लढने के बारे में आपको सवाल पूछा, आपने जवाब दिया की यहाँ का मतदार जागृत नहीं होने की वजह से  मै अगर चुनाव लढ़ भी लू तो मेरी जमानत जप्त हो जाएगी ! आप जमानत जप्त होने की बारे में जितने शास्वत दिखे उतने ही यहाँ का मतदार जागृत नहीं होने के बारे में भी शास्वत दिखे ! ऐसे ही मतदार के बीच  भ्रष्टाचार को लेकर आपने एक जंग छेड़ी इसलिए आपकी जितनी तारीफ करो उतनी कम है लेकिन इस जंग की आपकी लढाई देखकर कई सवाल खड़े होते नजर आ रहे है ! मान लो आनेवाले दिनों में इस भारत में भाजपा की सरकार आती है और ऐसे ही सोये हुए मतदारो को साथ लेकर यही रास्ता यहाँ के साम्प्रदायिक ताकतोने राम मंदिर बनाने के लिए अख्तियार किया और संसद के पाच और समाज सेवक पाच तो उस वक्त  इस देश की हालत क्या होगी इस बारे में थोडा आपने सोचा होता तो बेहतर होता ! राम मंदिर के आन्दोलन में समाज सेवक पाच और सरकार के पाच कौन होगे यह तो आपको समजता ही होगा और इतनी समज आपको होनी भी चाहिए ! इस देश का चित्र क्या होगा यह सोचने की जरूरत है ! 
अन्ना , भ्रष्टाचार के साथ ही इस देश में कई बड़ी समस्या है, जातिवाद , दलितों पर अत्याचार, आदि. जब किसी दलित को जिन्दा जलाया जाता है, किसी नारी पर सरे आम बलात्कार किया जाता हो, उस वक्त यहाँ का कोई अन्ना , मिडिया , या कोई समाजसेवक इतना जागृत नहीं दीखता ! आपके ही महाराष्ट्र में खैरलांजी का हत्याकांड हुआ ! आज भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आप के साथ जितने लोग सड़क पर उतरे उससे पाच गुना लोग बलात्कारी को सजा देने की लिए सड़क पर सात दिन अपना आन्दोलन  करते रहे ! उस वक्त यहाँ के समाज सेवक , मिडिया , और आप की देशभक्ति कहा थी ? यह सवाल आज खड़ा हो रहा है ! फिर आपके के पीछे ऐसे कौन लोग है जो अचानक से सोये हुए लोगो में , मिडिया में इतनी देशभक्ति का निर्माण किया ? आप ने अपने मंडप में माता की तस्वीर लगा रखी थी जिस की भारत की संविधान में कही जगह नहीं, साथ ही आपके आन्दोलन कारी अनुपम खेर संविधान को उखाड फेकने की बात करते है और आप के लोग अनुपम खेर के साथ होने की बात करते है उस वक्त ऐसे सोचने के लिए मजबूर होना पड़ता है की इस आन्दोलन की बागडोर आप के हाथ में नहीं है ! आप को सिर्फ एक मोहरा बनाकर पेश किया जा रहा है ! भ्रष्टाचार इस देश से ख़त्म हो ऐसा हर नागरिक को लगता है ! लेकिन संविधानिक तरीके से इसका निर्मूलन होना चाहिए ! सरकार के नुमायिंदे तो संविधानिक तरीके से चुने हुए होते है लेकिन समाज सेवक को चुनने का संविधानिक तरीका क्या होगा ? फिर चार लोगो ने सोये हुए मतदारो को साथ लेकर किसी बात के लिए आन्दोलन छेड़ा और मिडिया को किराये पर लेकर सरकार पर दबाव बनाया उस वक्त पाच समाज सेवक उनके ही होगे !क्या यह बात संविधानिक होगी ? 
अन्ना , गाँधी जयंती के अवसरपर मरीज को सेफ , अंगूर खिलानेसे इस देश का भ्रष्टाचार ख़त्म होनेवाला नहीं ! उस मरीज को सेफ और अंगूर कमाने के लायक बनाना होगा ! गांधीजी ने समाज सेवा को महत्व दिया था तो डा आंबेडकर ने समाज के परिवर्तन को जरुरी समजा था !

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